बरेली में कूड़ा फेंका तो कटेगा बिजली-पानी कनेक्शन! 500 मीट्रिक टन क्षमता वाला प्लांट करेगा बड़ा बदलाव
बरेली में 500 मीट्रिक टन क्षमता वाला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट जल्द शुरू होगा। खुले में कूड़ा फेंकने और गीला-सूखा कचरा अलग न रखने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बरेली. बरेली में कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। नगर निगम ने ठोस कचरा प्रबंधन नियमों को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। अब खुले में कूड़ा फेंकने, गीले और सूखे कचरे को अलग न रखने तथा सार्वजनिक स्थानों पर मलबा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही सथरापुर में 500 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को शुरू करने की तैयारियां भी तेज हो गई हैं।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने वालों को अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
क्या होंगे नए नियम?
- खुले में कूड़ा फेंकने पर जुर्माना।
- सार्वजनिक स्थानों पर मलबा डालने पर कार्रवाई।
- गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखना अनिवार्य।
- बार-बार नियम तोड़ने पर बिजली और पानी का कनेक्शन काटा जा सकता है।
नगर निगम का उद्देश्य शहर में कचरा प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।
गीला-सूखा कचरा अलग नहीं किया तो कटेगा चालान
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के अनुसार हर घर, संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान को कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण करना होगा।
अलग-अलग रखना होगा
- गीला कचरा
- सूखा कचरा
- सैनिटरी वेस्ट
- ई-वेस्ट और विशेष श्रेणी का कचरा
जांच के दौरान मिश्रित कचरा मिलने पर चालान किया जाएगा।
होटल, अस्पताल और मॉल को खुद करना होगा निस्तारण
नगर निगम ने बड़े संस्थानों के लिए भी विशेष निर्देश जारी किए हैं।
किन संस्थानों पर लागू होंगे नियम?
- होटल
- अस्पताल
- शॉपिंग मॉल
- बड़ी आवासीय सोसायटी
इन सभी को अपने परिसर में ही कचरे के निस्तारण की व्यवस्था विकसित करनी होगी।
500 मीट्रिक टन क्षमता वाला प्लांट बदलेगा तस्वीर
सथरापुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को जल्द शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। प्लांट की प्रमुख विशेषताएं
- प्रतिदिन 500 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण।
- वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रोसेसिंग।
- लैंडफिल पर दबाव में कमी।
- पर्यावरण प्रदूषण में कमी।
नगर निगम के अनुसार प्लांट के लिए मशीनों का इंस्टॉलेशन शुरू हो चुका है और तकनीकी कार्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी दे सकते हैं बड़ी सौगात
नगर निगम को उम्मीद है कि योगी आदित्यनाथ के संभावित दौरे के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण किया जा सकता है। यह परियोजना बरेली की स्वच्छता व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाली मानी जा रही है।
इंदौर और गुजरात मॉडल का होगा इस्तेमाल
पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने बताया कि बेहतर संचालन व्यवस्था के लिए इंदौर और गुजरात के शहरों में संचालित कचरा प्रबंधन मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है।
अध्ययन के मुख्य बिंदु
- कचरा प्रोसेसिंग तकनीक
- संचालन प्रणाली
- संसाधन प्रबंधन
- आधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल
इन मॉडलों के आधार पर बरेली में अधिक प्रभावी और टिकाऊ व्यवस्था विकसित की जाएगी।
स्वच्छ शहर की दिशा में बड़ा कदम
प्लांट शुरू होने के बाद शहर में कूड़े के ढेर, डंपिंग और प्रदूषण की समस्या में कमी आने की उम्मीद है। नगर निगम का मानना है कि वैज्ञानिक कचरा निस्तारण से न केवल स्वच्छता बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद बरेली का कूड़ा प्रबंधन मॉडल पूरी तरह बदल जाएगा और शहर स्वच्छता के नए मानक स्थापित कर सकेगा।




