TMC में बढ़ी कलह! कल्याण बनर्जी का ममता को अल्टीमेटम, अभिषेक बनर्जी से बनाई दूरी
TMC में अंदरूनी कलह तेज होती दिख रही है। वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी से दूरी बनाते हुए ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। जानिए पूरा मामला।

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती नजर आ रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कल्याण बनर्जी ने न केवल अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की, बल्कि उनके एक कानूनी मामले से खुद को अलग करने का भी ऐलान कर दिया।
ममता को दिया सीधा संदेश
कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी नेतृत्व को तय करना होगा कि उसे वफादार और अनुभवी नेताओं के साथ आगे बढ़ना है या फिर केवल परिवारवाद को प्राथमिकता देनी है। उन्होंने संकेतों में ममता बनर्जी से कहा कि उन्हें अभिषेक बनर्जी और पुराने वफादार नेताओं के बीच चुनाव करना होगा।
उनका कहना था कि अभिषेक बनर्जी ने कभी उन पर भरोसा नहीं किया और भविष्य में भी ऐसा होने की संभावना नहीं है। इसी वजह से उन्होंने उनके खिलाफ चल रहे कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले से खुद को अलग करने का निर्णय लिया है।
‘आधी रात को बदला गया वकील’
कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि वह अभिषेक बनर्जी के मामले की तैयारी कर रहे थे, लेकिन देर रात उन्हें जानकारी दी गई कि केस के लिए वकील बदल दिया गया है। उन्होंने इसे अपमानजनक बताते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं के सम्मान का ध्यान नहीं रखा गया।
उन्होंने अभिषेक बनर्जी के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि अहंकार किसी भी राजनीतिक दल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
TMC के लिए बढ़ती मुश्किलें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कल्याण बनर्जी का यह रुख तृणमूल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय हो सकता है। वह लंबे समय से पार्टी के प्रमुख रणनीतिक और कानूनी चेहरों में शामिल रहे हैं और कई अहम मामलों में पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं। उनकी नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं पहले से चल रही हैं।
नेताओं के अलग होने की अटकलें तेज
कल्याण बनर्जी के बयान से पहले भी पार्टी के कुछ नेताओं के अलग रुख अपनाने की खबरें सामने आई थीं। राजनीतिक हलकों में इसे TMC के भीतर बढ़ती गुटबाजी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी इस विवाद को किस तरह संभालती हैं और पार्टी में एकजुटता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती हैं।




