सरकारी जमीन पर बन रहा था रिसॉर्ट! शिकायत मिलते ही प्रशासन ने रुकवाया निर्माण कार्य
धमतरी के ग्राम बरारी में 70 डिसमिल सरकारी जमीन पर रिसॉर्ट निर्माण की शिकायत के बाद प्रशासन ने काम रुकवा दिया। पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण के आरोपों की जांच जारी है।

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण कर रिसॉर्ट निर्माण का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। मामला ग्राम बरारी का है, जहां सरकारी जमीन पर पेड़ों की कटाई कर रिसॉर्ट तैयार किए जाने की तैयारी चल रही थी।
शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
धमतरी जिले के ग्राम बरारी में करीब 70 डिसमिल शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर रिसॉर्ट निर्माण किए जाने की शिकायत प्रशासन तक पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल हस्तक्षेप किया और निर्माण कार्य रुकवाने के निर्देश दिए। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण गतिविधियों को बंद कराया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
सरकारी भूमि पर पेड़ों की कटाई का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शासकीय भूमि पर मौजूद पेड़ों की कटाई कर रिसॉर्ट निर्माण की तैयारी की जा रही थी। इससे पर्यावरणीय नियमों और भूमि उपयोग से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि पेड़ों की कटाई के लिए संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
40 साल से कब्जे का दावा
आरोपों के घेरे में आए बरारी निवासी खूबलाल ध्रुव ने कहा कि वह पिछले लगभग 40 वर्षों से उक्त भूमि पर रह रहा है। उनके अनुसार, डुबान प्रभावित होने के कारण उन्होंने यहां निवास किया और लंबे समय से भूमि पर काबिज हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों की शिकायत के बाद मामला सामने आया है और प्रशासन द्वारा की जाने वाली वैधानिक कार्रवाई उन्हें स्वीकार होगी।
जांच में जुटा प्रशासन
मामले के सामने आने के बाद कई अहम सवाल उठ रहे हैं। यदि भूमि शासकीय है तो उस पर निर्माण कार्य किस अनुमति के आधार पर किया जा रहा था? साथ ही पेड़ों की कटाई के लिए आवश्यक मंजूरी ली गई थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या हो सकती है आगे की कार्रवाई?
जांच में यदि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा या बिना अनुमति निर्माण की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत अतिक्रमण हटाने, निर्माण ध्वस्त करने और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, वन एवं पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की स्थिति में अलग से कार्रवाई संभव है।




