5 साल की सुस्ती खत्म! झारखंड लोकायुक्त कार्यालय में बढ़ी रफ्तार, रिकॉर्ड शिकायतों पर शुरू हुई सुनवाई
Jharkhand Lokayukta News: नए लोकायुक्त के पदभार संभालने के बाद डेढ़ महीने में 100 नई शिकायतें दर्ज हुईं। 1400 लंबित फाइलों की समीक्षा और भ्रष्टाचार मामलों में जांच तेज हुई।

रांची. झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को नई गति मिलती दिख रही है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद लोकायुक्त कार्यालय अब सक्रिय मोड में नजर आ रहा है। नए लोकायुक्त के पदभार संभालने के बाद महज डेढ़ महीने में 100 नई शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि सैकड़ों लंबित मामलों की सुनवाई और निष्पादन की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।
लोकायुक्त कार्यालय में बढ़ी सक्रियता
पांच वर्षों तक अपेक्षाकृत निष्क्रिय रहे लोकायुक्त झारखंड कार्यालय में अब तेजी से काम हो रहा है। इसी वर्ष 21 अप्रैल 2026 को Justice Amitabh Kumar Gupta ने लोकायुक्त का पदभार संभाला, जिसके बाद भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
डेढ़ महीने में 100 नई शिकायतें
लोकायुक्त कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पूरे 12 महीनों में 157 शिकायतें दर्ज हुई थीं। वहीं वर्ष 2026 में अब तक 161 शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें से 100 शिकायतें केवल पिछले डेढ़ महीने में दर्ज हुई हैं, जिन पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
1400 लंबित फाइलों की समीक्षा
लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने पदभार ग्रहण करने के बाद करीब 1400 लंबित फाइलों की समीक्षा की है। इनमें से 272 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है, जबकि 250 मामलों में सुनवाई के आदेश जारी किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं और मामलों की सुनवाई के साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
एसीबी को दिए गए जांच के आदेश
भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों में लोकायुक्त ने Anti Corruption Bureau (एसीबी) को जांच के निर्देश दिए हैं। इनमें मुख्य रूप से लोकसेवकों द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप शामिल हैं।
इसके अलावा भूमि विवाद, टेंडर आवंटन, सेवांत लाभ नहीं मिलने और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें भी बड़ी संख्या में सामने आई हैं।
अंचल कार्यालयों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें
लोकायुक्त कार्यालय को मिल रही शिकायतों में सबसे अधिक मामले अंचल स्तर पर कथित भ्रष्टाचार से जुड़े हैं। शिकायतों में रसीद जारी करने में बाधा, दाखिल-खारिज मामलों में अनियमितता, रिश्वत की मांग तथा बिना पक्ष सुने आवेदनों को निरस्त करने जैसे आरोप शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में संबंधित अंचल अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष भी मांगा जा सकता है।
भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई से बढ़ी उम्मीदें
लोकायुक्त कार्यालय में बढ़ती शिकायतों और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह गति बनी रही तो आम लोगों को शिकायतों के समाधान के लिए अधिक प्रभावी मंच मिल सकेगा।




