योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला, अब CM के सीधे नियंत्रण में आएगा यूपीडा; एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार
योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए UPEDA को अवस्थापना विभाग के अधीन कर दिया है। अब एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री करेंगे। साथ ही स्टार्टअप नीति-2026 में युवाओं और उद्यमियों के लिए बड़े प्रोत्साहन की तैयारी।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे और बड़ी आधारभूत परियोजनाओं के क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। सरकार ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) से जुड़े सभी कार्यों को औद्योगिक विकास विभाग से हटाकर अवस्थापना विकास अनुभाग के अधीन कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास अवस्थापना विभाग होने के कारण अब एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री स्तर पर होगी। वहीं, सरकार प्रदेश को देश का अग्रणी स्टार्टअप हब बनाने के लिए नई स्टार्टअप नीति-2026 तैयार करने में भी जुट गई है।
यूपीडा अब अवस्थापना विभाग के अधीन
प्रदेश सरकार ने आदेश जारी कर यूपीडा से संबंधित सभी कार्यों को तत्काल प्रभाव से अवस्थापना विकास अनुभाग को सौंप दिया है। अब तक यह जिम्मेदारी औद्योगिक विकास विभाग के अनुभाग-3 के पास थी। शासन का मानना है कि इस बदलाव से एक्सप्रेसवे और अन्य बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्णय और क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
विरोधाभास खत्म करने के लिए लिया गया फैसला
सचिव सचिवालय प्रशासन गुर्राला श्रीनिवासुलु द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि अवस्थापना विकास अनुभाग पहले से ही बड़ी लागत वाली इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की नीति निर्धारण और समन्वय का कार्य देखता है। वहीं, यूपीडा की एक्सप्रेसवे परियोजनियां औद्योगिक विकास विभाग के पास थीं। इससे कार्य आवंटन में विरोधाभास की स्थिति बन रही थी। इसी कारण सभी संबंधित कार्यों को एक ही विभाग के अधीन लाने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री सीधे करेंगे परियोजनाओं की मॉनिटरिंग
अवस्थापना विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास होने से अब एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और अन्य रणनीतिक परियोजनाओं की समीक्षा सीधे मुख्यमंत्री स्तर पर होगी। इससे परियोजनाओं की मंजूरी, निगरानी और समन्वय प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
स्टार्टअप नीति-2026 पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को नई स्टार्टअप नीति-2026 तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्टार्टअप्स को भरण-पोषण भत्ता, प्रोटोटाइप अनुदान, सीड कैपिटल सहायता, पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन जैसी सुविधाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।
महिला और युवा उद्यमियों को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन
नई नीति में महिला उद्यमियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर उद्यमियों तथा पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन देने की तैयारी है। इसके साथ ही स्टार्टअप गतिविधियों के बेहतर संचालन और निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन के गठन का भी प्रस्ताव है।
यूपी को बनाना है राष्ट्रीय स्टार्टअप हब
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास युवा शक्ति, विशाल बाजार, मजबूत डिजिटल ढांचा और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल मौजूद है। नई नीति का उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। उन्होंने स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक हर स्तर पर सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया।




