व्यापार

India Oil Import Shift: रूस पीछे, नया सप्लायर बना भारत का फेवरेट

भारत के कच्चे तेल आयात में बड़ा बदलाव, रूस से सप्लाई घटी तो सऊदी अरब बना टॉप सप्लायर। जानें फरवरी-मार्च के ताजा आंकड़े और नई ऑयल रणनीति।

नई दिल्ली. भारत की कच्चे तेल (Crude Oil) आयात रणनीति में बड़ा बदलाव दिख रहा है। ताजा शिपमेंट डेटा और एक्सपर्ट्स के आकलन बताते हैं कि जहां रूस से तेल की आवक धीरे-धीरे कम हो रही है, वहीं सऊदी अरब के नेतृत्व में पश्चिम एशिया के देश फिर से अपनी बाजार हिस्सेदारी मजबूत कर रहे हैं। जियो-पॉलिटिकल दबाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का असर अब भारत की खरीद पर साफ दिखाई दे रहा है।

रूस से तेल आयात में गिरावट

1 से 18 फरवरी के बीच भारत का कुल कच्चा तेल आयात घटकर
➡️ 48.5 लाख बैरल प्रति दिन (BPD) रह गया
जबकि जनवरी में यह
➡️ 52.5 लाख BPD था

यानी करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई।

इस कमी की मुख्य वजह:
✔ रूसी निर्यातकों पर अमेरिकी प्रतिबंध
✔ यूरोपीय संघ का 18वां प्रतिबंध पैकेज

दिसंबर से फरवरी तक लगातार फिसलन

रूस से भारत को होने वाली सप्लाई:

  • दिसंबर 2025: 12.8 लाख BPD
  • जनवरी 2026: 12.2 लाख BPD
  • फरवरी (शुरुआत): 10.9 लाख BPD
  • यानी कुछ ही महीनों में करीब 10% की और गिरावट।

मार्च में और कम हो सकती है खरीद

Kpler के चीफ रिसर्च हेड सुमित रितोलिया के मुताबिक:

  • फरवरी में रूसी तेल आयात: 10–12 लाख BPD
  • मार्च में घटकर: 8–10 लाख BPD रहने का अनुमान
  • हालांकि यह पूरी तरह बंद नहीं होगा, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और बेसिक जरूरतों के लिए सीमित खरीद जारी रखेगा।

क्यों घट रही रूस की हिस्सेदारी?

✔ प्रतिबंधों के कारण लॉजिस्टिक और पेमेंट दिक्कतें
✔ वैश्विक राजनीतिक दबाव
✔ डिस्काउंट में कमी
✔ सप्लाई का डायवर्सिफिकेशन

एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में रूस की हिस्सेदारी
➡️ निचले स्तर पर स्थिर हो सकती है,
लेकिन 2022-23 जैसे हाई लेवल पर लौटना मुश्किल है।

सऊदी अरब ने बढ़ाया दबदबा

रूसी तेल की कमी को पश्चिम एशिया पूरा कर रहा है।

फरवरी में सऊदी सप्लाई का अनुमान:
10–11 लाख BPD

महीने की शुरुआत में फ्लो:
करीब 14 लाख BPD

यह नवंबर 2019 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

मौजूदा रुझानों के अनुसार:
🥇 सऊदी अरब – नंबर 1 सप्लायर
🥈 रूस
🥉 इराक

भारत की नई ऑयल रणनीति क्या कहती है?

भारत अब:
✔ एक ही देश पर निर्भरता कम कर रहा
✔ मल्टी-सोर्स इंपोर्ट मॉडल अपना रहा
✔ जियो-पॉलिटिकल रिस्क बैलेंस कर रहा

यानी सस्ती कीमत + सप्लाई सुरक्षा दोनों पर फोकस।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button