मध्य प्रदेश

बजट 2026 में मध्यप्रदेश को झटका: 7,500 करोड़ कम, शहरों के विकास को 5,000 करोड़

केंद्रीय बजट में मध्य प्रदेश की कर हिस्सेदारी घटने से राज्य को अगले पांच साल तक सालाना 7,500 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। हालांकि टियर-2, टियर-3 शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से राहत की उम्मीद है।

भोपाल. मध्य प्रदेश की केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ने के बजाय घट गई है। इसके चलते राज्य को अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक हर साल करीब 7,500 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। वहीं मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 (31 मार्च 2026 तक) में ही राज्य को 2,314 करोड़ रुपये कम मिलने का अनुमान है।

विशेषज्ञों की राय: कैपेक्स से हो सकता है संतुलन

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही केंद्रीय करों में हिस्सेदारी घटी हो, लेकिन कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) के प्रावधानों से मध्य प्रदेश को कुछ राहत मिल सकती है। अनुमान है कि इस वर्ष राज्य को केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं। इसके अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है।

बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों पर फोकस

रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना 9वां केंद्रीय बजट पेश किया। इसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका लाभ मध्य प्रदेश के करीब 10 शहरों को मिल सकता है। साथ ही देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में से एक भोपाल को मिलने की संभावना जताई जा रही है।

सिंहस्थ 2028 को लेकर निराशा#

मध्य प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए केंद्र से 20,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की थी, लेकिन बजट में इस संबंध में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई।

16वें वित्त आयोग की सिफारिशों का असर

केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी (Vertical Devolution) को 41% पर बरकरार रखा है। हालांकि राज्यों के बीच बंटवारे (Horizontal Devolution) के फॉर्मूले में बदलाव से मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 7.86% से घटकर 7.34% कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, 0.503% की यह कटौती राज्य के लिए हर साल करीब 7,500 करोड़ रुपये के नुकसान के बराबर है।

इसी साल 2,314 करोड़ का तत्काल झटका

पहले अनुमान था कि राज्य को 1,11,662 करोड़ रुपये मिलेंगे, लेकिन संशोधित आंकड़ों में यह घटकर 1,09,348 करोड़ रुपये रह गया है। यानी इसी वित्तीय वर्ष में राज्य को 2,314 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। यह कटौती ऐसे समय में हुई है, जब राज्य सरकार जी राम जी जैसी योजनाओं में अपनी हिस्सेदारी 10% से बढ़ाकर 30% करने की तैयारी कर रही है, जिससे वित्तीय दबाव और बढ़ेगा।

10 शहरों को मिल सकते हैं 5,000–7,000 करोड़

टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए घोषित 12 लाख करोड़ रुपये की विशेष सहायता से मध्य प्रदेश के लगभग 10 शहरों को लाभ मिलने की संभावना है। वित्तीय जानकारों के मुताबिक, भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों को करीब 7,000 करोड़ रुपये, जबकि अन्य शहरों को कुल मिलाकर 5,000 करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग सड़क, जल आपूर्ति, सीवरेज और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाएगा।

यूनिवर्सिटी टाउनशिप की संभावना

देश की प्रस्तावित पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में से एक भोपाल को मिल सकती है। एयरपोर्ट के पास भौंरी क्षेत्र में राज्य सरकार पहले से ही AI और नॉलेज सिटी विकसित कर रही है, जिसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप में बदला जा सकता है।

अमृत बॉन्ड जारी कर सकेंगे नगर निगम

भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे बड़े नगर निगम 1,000 करोड़ रुपये तक के अमृत बॉन्ड जारी कर सकेंगे, जिससे उन्हें केंद्र से 100 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। पहले से लागू व्यवस्था के तहत 200 करोड़ रुपये तक के बॉन्ड पर केंद्र सरकार 18% की सहायता देती है।

अमृत 2.0 और ‘महिला अमृत मित्र’

अटल नवीनीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT) 2.0 के तहत केंद्र ने 2025-26 के लिए 7,022 करोड़ रुपये जारी किए हैं। भोपाल में 194 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, जिनमें कोलार और बैरागढ़ में नया सीवेज नेटवर्क शामिल है।
इस योजना के तहत 10,000 ‘महिला अमृत मित्र’ की तैनाती की जाएगी, जो स्थानीय स्तर पर पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी करेंगी।

विपक्ष का हमला

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बजट को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि “डबल इंजन सरकार” ने मध्य प्रदेश की जनता के साथ अन्याय किया है और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी घटाकर राज्य को सालाना 7,500 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है।

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