चुनावी मंच पर नफरत का जहर: बांग्लादेश में उम्मीदवार का भड़काऊ नारा
बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा बढ़ने के आरोप। रिपोर्ट में दावा—वोट के लिए योजनाबद्ध उकसावा, कट्टरपंथी गठजोड़ और सरकार की निष्क्रियता पर सवाल।

ढाका. बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने के आरोप तेज हो गए हैं। फरवरी में प्रस्तावित चुनावों से पहले देश का माहौल और अधिक सांप्रदायिक होता जा रहा है। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जबकि सरकार इन्हें छिटपुट घटनाएं बताकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है।
चुनावी गणित और सांप्रदायिक उकसावे के आरोप
इसी बीच सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वोट हासिल करने के लिए हिंदुओं पर हमलों को जानबूझकर बढ़ावा दिया जा रहा है। खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने की सोची-समझी रणनीति तैयार की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हालिया घटनाएं आकस्मिक नहीं, बल्कि डर और धमकी के जरिए मतदान प्रभावित करने की योजना का हिस्सा हैं।
कट्टरपंथी गठजोड़ पर चिंता
शीर्ष खुफिया सूत्रों ने मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि कट्टर मौलवियों और स्थानीय नेताओं के बीच सांठगांठ के संकेत मिले हैं। कई मौकों पर मौलवियों को नफरत भरे बयान देते और जनता से हिंदू या गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों को वोट न देने की अपील करते देखा गया है।
सांसद उम्मीदवार का कबूलनामा
रिपोर्ट में एक सांसद उम्मीदवार के कथित कबूलनामे का भी जिक्र है। उसके अनुसार, वर्षों से चुनाव जीतने के लिए हिंदू बहुल इलाकों पर हमलों और यहां तक कि हिंसा के लिए उकसावे की रणनीतियां अपनाई जाती रही हैं। आरोप है कि ऐसे हमलों को अंजाम देने वालों का ‘इस्लाम के सैनिक’ कहकर महिमामंडन भी किया जा रहा है, जिससे हालात और बिगड़ रहे हैं।




