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3. सियासी हलचल तेज: शंकराचार्य विवाद पर उमा भारती का तीखा हमला

शंकराचार्य विवाद पर भाजपा में मतभेद, उमा भारती ने यूपी प्रशासन द्वारा प्रमाण मांगे जाने को अधिकारों का उल्लंघन बताया।

भोपाल. उत्तर प्रदेश सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच जारी टकराव और खींचतान को लेकर अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर ही मतभेद के स्वर उभरने लगे हैं। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने शंकराचार्य होने के प्रमाण मांगे जाने की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे प्रशासनिक अधिकारों और मर्यादाओं का उल्लंघन बताया है।

उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग किया और उम्मीद जताई कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा। उन्होंने लिखा कि शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना प्रशासन का अधिकार क्षेत्र नहीं है और यह निर्णय केवल शंकराचार्य परंपरा व विद्वत परिषद के अधिकार में आता है।

माघ मेला प्रशासन द्वारा भेजे गए नोटिस से बढ़ा विवाद

मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में हुई घटनाओं को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए अनशन शुरू किया था। इस मामले को लेकर संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच लगातार चर्चा बनी हुई है। इसी क्रम में प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उच्चतम न्यायालय के एक नोटिस का हवाला देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा था।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष

नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि शंकराचार्य वही होता है जिसे अन्य पीठों के शंकराचार्य मान्यता दें। उनका दावा है कि द्वारका पीठ और श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य उन्हें शंकराचार्य के रूप में स्वीकार करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले माघ मेले में दोनों पीठों के शंकराचार्य उनके साथ स्नान कर चुके हैं। ऐसे में जब परंपरागत रूप से मान्यता मिल चुकी है, तो शंकराचार्य होने के लिए किसी अतिरिक्त प्रमाण की आवश्यकता ही नहीं रह जाती।

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