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वैश्विक सियासत में हलचल: Donald Trump की धमकी, तेहरान अलर्ट— खामेनेई और भारत कनेक्शन

ईरान–अमेरिका तनाव चरम पर। खामेनेई अंडरग्राउंड, ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए। UNHRC में भारत के समर्थन पर ईरान ने जताया आभार।

वाशिंगटन. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई के खतरे को देखते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई को तेहरान में एक अत्यंत सुरक्षित अंडरग्राउंड ठिकाने पर शिफ्ट कर दिया गया है।

बंकर में छिपे खामेनेई, सुरंगों से जुड़ा है सुरक्षित ठिकाना

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई को ऐसी जगह ले जाया गया है, जहां कई आपस में जुड़ी सुरंगें, आधुनिक सुरक्षा उपकरण और मजबूत रक्षा व्यवस्था मौजूद है। अमेरिकी हमले की आशंका के बीच यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है।

बेटे मसूद खामेनेई संभाल रहे हैं कार्यालय का कामकाज

खामेनेई के भूमिगत रहने के दौरान उनके तीसरे बेटे मसूद खामेनेई सर्वोच्च नेता कार्यालय का दैनिक कामकाज संभाल रहे हैं और सरकार के साथ संपर्क का मुख्य माध्यम बने हुए हैं।

सर्वोच्च नेता पर हमला मतलब पूर्ण युद्ध: ईरानी राष्ट्रपति

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि सर्वोच्च नेता पर किसी भी तरह का हमला पूरे ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध माना जाएगा।

ट्रंप की चेतावनी: ईरान की ओर बढ़ रहा अमेरिकी जंगी बेड़ा

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि एक अमेरिकी ‘अर्माडा’ (जंगी बेड़ा) ईरान की ओर बढ़ रहा है।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन और कई विध्वंसक पोत फिलहाल हिंद महासागर में तैनात हैं।

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “हम ईरान की ओर फोर्स भेज रहे हैं। जरूरत पड़ी तो कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह दावा भी किया कि उनके सख्त रुख के कारण ईरान ने करीब 840 लोगों को फांसी देने का फैसला टाल दिया।

UNHRC में भारत के समर्थन पर ईरान ने जताया आभार

तनाव के बीच ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने भारत सरकार को धन्यवाद दिया है। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ईरान के खिलाफ लाए गए एक प्रस्ताव के विरोध में भारत ने मतदान किया था। भारत ने चीन और पाकिस्तान के साथ मिलकर इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया।

यह प्रस्ताव ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की अंतरराष्ट्रीय जांच से जुड़ा था। भारत का रुख ऐसे देश-विशेष प्रस्तावों के खिलाफ उसकी पुरानी नीति के अनुरूप बताया जा रहा है।

ईरान में हिंसक प्रदर्शन, हजारों मौतों की आशंका

दिसंबर के अंत से ईरान में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान व्यापक हिंसा हुई है। मानवाधिकार संगठनों और UN विशेषज्ञों के अनुसार, इन घटनाओं में 5,000 से 20,000 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है।

इतिहास का सबसे लंबा इंटरनेट ब्लैकआउट

8 जनवरी 2026 को ईरान ने अपने इतिहास का सबसे लंबा और व्यापक इंटरनेट ब्लैकआउट लागू किया, जिससे देश का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग पूरी तरह कट गया।

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