किताबी ज्ञान से आगे: छात्रों ने परंपरागत कला और तकनीकों का लिया व्यावहारिक अनुभव

भोपाल. सोसायटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंग्स्ट यूथ (स्पिक मैके) द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की में आयोजित ‘विरासत-2026’ कार्यशाला में मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध हस्तशिल्प कला बाग प्रिंट की प्रभावशाली प्रस्तुति देखने को मिली। 22 से 25 जनवरी तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन में बाग (मध्यप्रदेश) के प्रतिष्ठित मास्टर क्राफ्ट्समैन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित मोहम्मद बिलाल खत्री ने युवाओं को इस पारंपरिक कला की बारीकियों से परिचित कराया।
ठप्पों से उकेरी कला, सीखी पारंपरिक रंगाई
कार्यशाला के शुरुआती दो दिन (22–23 जनवरी) विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से रोमांचक रहे। छात्रों ने पारंपरिक लकड़ी के ठप्पों (ब्लॉक्स) और प्राकृतिक रंगों की मदद से कपड़ों पर सुंदर डिज़ाइन तैयार किए। मोहम्मद बिलाल खत्री ने युवाओं को बताया कि किस तरह प्रकृति से प्राप्त रंगों का उपयोग कर कपड़े पर अमिट और टिकाऊ छाप छोड़ी जाती है, जो बाग प्रिंट की पहचान है।
‘विचलिये’ और ‘भट्टी’ की जटिल प्रक्रिया से परिचय
शनिवार, 24 जनवरी को छात्रों को बाग प्रिंट की सबसे जटिल और महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव कराया गया—
- विचलिये: बहते पानी में कपड़े को धोने की विशेष पारंपरिक प्रक्रिया।
- भट्टी: धावड़ी (पहाड़ी व मैदानी क्षेत्रों में पाया जाने वाला लाल फूलों वाला झाड़ीदार वृक्ष) के फूलों और अलीज़रीन (ऑल व मैहर की जड़ों) के साथ कपड़े को उबालकर रंगों को स्थायी बनाने की विधि।
- इन प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष देखकर छात्रों ने इस कला की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक गहराई को समझा।
लुप्त होती कलाओं के संरक्षण पर जोर
मोहम्मद बिलाल खत्री ने कहा कि स्पिक मैके का मूल उद्देश्य देश की लुप्त होती प्राचीन कलाओं का संरक्षण और विस्तार करना है।
उन्होंने कहा, “IIT रुड़की के छात्रों ने जिस रुचि और समर्पण के साथ इस पुश्तैनी हुनर को सीखा, वह बेहद सराहनीय है।” कार्यशाला के अंतिम दिन (25 जनवरी) विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के कपड़ों और उन पर बाग प्रिंट की विशेषताओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
भारतीय विरासत का बहुआयामी प्रदर्शन
रुड़की में आयोजित ‘विरासत-2026’ में हस्तशिल्प के साथ-साथ योग, संगीत और अन्य सांस्कृतिक विधाओं के जरिए भारतीय परंपरा और विरासत का व्यापक प्रदर्शन किया गया। मोहम्मद बिलाल खत्री के मार्गदर्शन में तैयार की गई बाग प्रिंट कलाकृतियां कार्यशाला के दौरान आकर्षण का केंद्र रहीं और युवाओं के बीच इस पारंपरिक कला के प्रति नई रुचि जगाने में सफल रहीं।




