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नोएडा केस में नया मोड़: पुलिस की दलील पर भड़का विवाद

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में युवराज मेहता की मौत पर पुलिस का स्पष्टीकरण सामने आया, लेकिन रेस्क्यू में देरी और निर्माण साइट की लापरवाही को लेकर सवाल बरकरार हैं।

नई नोएडा. ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने प्रशासनिक तैयारियों और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 16 जनवरी 2026 की रात घने कोहरे के बीच घर लौटते समय उनकी एसयूवी एक निर्माणाधीन साइट के पास पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी। युवराज कार की छत पर चढ़कर करीब दो घंटे तक मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर रेस्क्यू न हो पाने के कारण उनकी जान चली गई।

हादसे के बाद क्या हुआ?

सूचना मिलते ही नोएडा पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस के अनुसार, डायल 112 पर कॉल मिलते ही पीआरवी न्यूनतम समय में घटनास्थल पर पहुंच गई।

रेस्क्यू के लिए लाइफ बॉय रिंग, एयर-फिल्ड रबर बोट, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, सर्च लाइट, लाइफ-सेविंग रोप और एक्सटेंशन लैडर जैसे उपकरण उपलब्ध थे। हालांकि, घना कोहरा और बेहद कम दृश्यता के कारण बचाव कार्य प्रभावित हुआ। युवराज को बाहर निकालने में देरी हुई, जबकि कार को गड्ढे से निकालने में चार दिन लगे।

पुलिस के दावे, लेकिन सवाल और गहरे

नोएडा पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि संसाधनों की कोई कमी नहीं थी और हर संभव प्रयास किए गए। बावजूद इसके, यह सवाल उठ रहा है कि इतने उपकरण और टीमें मौजूद होने के बाद भी युवराज को बचाया क्यों नहीं जा सका।

वायरल वीडियो में रेस्क्यू कर्मियों को निर्देश देते देखा गया, लेकिन कोई भी पानी में उतरता नजर नहीं आया। इस बीच एक फ्लिपकार्ट डिलीवरी एजेंट मोनिंदर सिंह ने खुद पानी में उतरकर बचाने की कोशिश की, पर अकेले प्रयास पर्याप्त नहीं हो सके। कुछ रिपोर्ट्स में उन पर बयान बदलने का दबाव डाले जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

जांच और कार्रवाई तेज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मामले की उच्च स्तरीय एसआईटी गठित की गई है। एसआईटी ने घटनास्थल पर सीन रीक्रिएशन कर जांच शुरू की।

निर्माण साइट पर सुरक्षा मानकों में लापरवाही के आरोप में लोटस ग्रीन के दो बिल्डरों रवि बंसल और सचिन कर्णवाल को गिरफ्तार किया गया है।

इसके अलावा नोएडा प्राधिकरण से डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जो 24 जनवरी को सरकार को सौंपी जाएगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए कई अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।

सोशल मीडिया पर आक्रोश

यह घटना अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का प्रतीक बन गई है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि ‘स्मार्ट सिटी’ कहे जाने वाले नोएडा में खुले गड्ढे और बिना बैरिकेडिंग वाली निर्माण साइटें क्यों मौजूद हैं। युवराज के पिता का कहना है कि अगर समय पर और साहसिक रेस्क्यू होता, तो उनका बेटा आज जीवित होता।

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