मध्य प्रदेश

गैस पीड़ितों के साथ हर कदम पर खड़ी है सरकार: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड परिसर में बनेगा स्मारक। सीएम डॉ. मोहन यादव ने परिसर का निरीक्षण कर कहा—कोर्ट के मार्गदर्शन में कचरे का सुरक्षित निष्पादन, अब होगा समग्र विकास।

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 2 और 3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात भोपाल में मिथाइल आइसोसायनेट (MIC) गैस का रिसाव देश की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक था। इस हादसे में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और करीब 40 वर्षों तक यूनियन कार्बाइड परिसर में रासायनिक कचरा पड़ा रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने माननीय उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में बिना किसी पर्यावरणीय नुकसान और मानव हानि के इस कचरे का सफल निष्पादन कराया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब समाज के सभी वर्गों और प्रभावित पक्षों को विश्वास में लेकर यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड परिसर का विकास किया जाएगा और भोपाल गैस त्रासदी में दिवंगत लोगों की स्मृति में यहां एक स्मारक का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गैस पीड़ितों के साथ हर कदम पर खड़ी है और उनके कल्याण में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।

यूनियन कार्बाइड परिसर का गहन निरीक्षण

शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के आरिफ नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधिकारियों से स्मारक निर्माण और आगे की विकास योजना को लेकर विस्तृत जानकारी ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव आलोक कुमार सिंह, आयुक्त जनसंपर्क दीपक कुमार सक्सेना, संचालक गैस राहत स्वतंत्र कुमार सिंह, भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

परिसर के विकास के लिए सभी जरूरी प्रबंध

मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत रासायनिक कचरे का निष्पादन पूरा हो चुका है और अब भोपाल मेट्रोपोलिटन एरिया के निर्माण के साथ इस परिसर के समुचित विकास के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे मध्यप्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने बिना सेफ्टी मास्क के फैक्ट्री के कोर एरिया का निरीक्षण किया।

1984 की त्रासदी पर सरकार का रुख

निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गैस रिसाव की यह घटना न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक गहरी त्रासदी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने इस क्षेत्र को लंबे समय तक लावारिस छोड़ दिया और जहरीले कचरे के निष्पादन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र में यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी गैस प्रभावित क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने कोर्ट के सभी निर्देशों का पालन करते हुए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जहरीले कचरे का निष्पादन कराया, जो पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है। इससे राजधानी भोपाल के माथे से एक बड़ा कलंक मिटा है।

भोपाल-इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाने की योजना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी विकास और सुशासन को मजबूती देने के लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें भोपाल और आसपास के छह जिले शामिल होंगे। इससे राजधानी के विकास में आ रही बाधाओं को दूर किया जाएगा।

जनसंपर्क के दौरान दिखाई संवेदनशीलता

निरीक्षण के बाद लौटते समय आरिफ नगर में एक महिला के अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने अपना काफिला रुकवाया और भगवान भोलेनाथ की मूर्ति पर अगरबत्ती अर्पित की। उन्होंने स्थानीय महिलाओं से योजनाओं के लाभ को लेकर बातचीत की और स्कूली बच्चों के साथ सेल्फी भी ली।

इसी दौरान दो महिलाओं—श्रीमती मंजु बाई और श्रीमती प्रभा बाई कुशवाहा—की आर्थिक सहायता के अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से दोनों को 50-50 हजार रुपये की सहायता तत्काल स्वीकृत की। नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिए गए कि सहायता राशि शीघ्र उनके बैंक खातों में पहुंचाई जाए।

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