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किचन में पानी और आग आमने-सामने? जानें क्यों बिगड़ता है वास्तु और क्या है सही दूरी

वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन सिंक की सही दिशा क्या होनी चाहिए? जानें सिंक लगाने की शुभ-अशुभ दिशाएं, चूल्हे से दूरी और वास्तु से जुड़ी जरूरी सावधानियां।

वास्तु शास्त्र में किचन केवल भोजन पकाने की जगह नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा और स्वास्थ्य का केंद्र माना जाता है। किचन में रखी हर वस्तु का सही स्थान घर की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर असर डालता है। इनमें किचन सिंक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। सिंक की गलत दिशा या गलत प्लेसमेंट से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।

किचन सिंक की शुभ दिशा

  • वास्तु के अनुसार किचन सिंक के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) सबसे शुभ मानी जाती है।
  • इस दिशा में सिंक होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
  • समृद्धि और मानसिक शांति में वृद्धि होती है।
  • बर्तन धोते समय व्यक्ति का मुख उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है, जिससे तनाव कम होता है और पारिवारिक संतुलन बना रहता है।

सिंक लगाने की गलत दिशाएं

  • दक्षिण-पश्चिम दिशा में किचन सिंक का होना अशुभ माना जाता है।
  • इससे पारिवारिक तनाव, आपसी मतभेद और आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
  • धन के आगमन और खर्च में असंतुलन की स्थिति बनती है।

गैस चूल्हे के पास न रखें सिंक

  • वास्तु के अनुसार अग्नि तत्व (गैस चूल्हा) और जल तत्व (सिंक) एक-दूसरे के विपरीत होते हैं।
  • चूल्हा और सिंक बहुत पास होने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • इससे घर की शांति, सेहत और रिश्तों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
  • दोनों के बीच पर्याप्त दूरी रखना या उनके बीच काउंटर स्पेस देना बेहतर माना जाता है।

सिंक के नीचे डस्टबिन रखने से बचें

  • किचन सिंक के नीचे डस्टबिन रखना वास्तु के अनुसार अनुचित है।
  • इससे नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है और स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
  • डस्टबिन को किचन के किसी अलग, ढके हुए और साफ स्थान पर रखना अधिक शुभ माना जाता है।

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