कुबेरेश्वरधाम में मकर संक्रांति का महापर्व, शिव भोग के लिए 5100 तिल-गुड़ के लड्डुओं की भव्य तैयारी
मकर संक्रांति पर सीहोर के कुबेरेश्वरधाम में भक्ति का महासंगम, 5100 तिल-गुड़ लड्डुओं का विशेष शिव भोग, हजारों श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रसादी व्यवस्था।

सीहोर. सीहोर स्थित कुबेरेश्वरधाम पर मकर संक्रांति का पर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी गहन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। सूर्य के उत्तरायण होने के इस शुभ संयोग पर भगवान शिव की आराधना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ धाम पहुंचने की संभावना है।
5100 तिल-गुड़ लड्डुओं का विशेष शिव भोग
मकर संक्रांति के अवसर पर इस वर्ष कुबेरेश्वरधाम में लगभग 5100 तिल-गुड़ के लड्डुओं का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। तिल और गुड़ को स्वास्थ्य, मधुरता और आपसी सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। आधुनिक भोजनशाला में शुद्धता और विधि-विधान के साथ इन लड्डुओं के निर्माण की तैयारियां की जा रही हैं। भोग अर्पण के बाद इन्हें श्रद्धालुओं को प्रसादी के रूप में वितरित किया जाएगा।
हजारों श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रसादी व्यवस्था
धाम में आने वाले हजारों भक्तों के लिए व्यापक स्तर पर प्रसादी की व्यवस्था की गई है। तिल-गुड़ लड्डुओं के साथ-साथ खिचड़ी, नुक्ती, मिठाई और नमकीन भी वितरित की जाएगी। मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है, जिसे कुबेरेश्वरधाम में पूरी श्रद्धा और सेवा भाव से निभाया जाएगा।
सेवा कार्यों में जुटे मंदिर पदाधिकारी
मंगलवार को मंदिर व्यवस्थापक पंडित समीर शुक्ला, पंडित विनय मिश्रा सहित अन्य सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने प्रसादी वितरण व्यवस्थाओं का जायजा लिया। समिति के वरिष्ठ सदस्य स्वयं निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। “सेवा ही शिव है” की भावना के साथ स्वयंसेवक पूरे उत्साह से व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं।
मकर संक्रांति का सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि मकर संक्रांति देशभर में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और नई फसल की शुरुआत का प्रतीक है। यह त्योहार धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश भी देता है।
रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियों पर भी मंथन
मकर संक्रांति आयोजन के साथ ही विठलेश सेवा समिति ने आगामी रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की। आयोजन की रूपरेखा तैयार करते हुए व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विचार किया गया। कुबेरेश्वरधाम निरंतर धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।




